Love Shayari | प्यार | HIndi Short stories


साथियों नमस्कार, आज हम आपके लिए “प्यार | Love Shayari” लेकर आएं हैं जहाँ आप प्यार मुहोब्बत की शायरियों को पढ़ सकते हैं और अपने चाहने वालों को भी भेज सकते हैं!


 Love Shayari

“प्यार करो मुझे”

क्या गिले-शिकवे रखते हो, आज़ाद करो मुझे…२
क्या कंजूसी करते हो, दिल खोल कर बर्बाद करो मुझे!

में वक्त नहीं जो गुज़र जाऊंगा, दिन ढलने के बाद…२
खोलो सारे दरवाज़े और आबाद करो मुझे!

मुहोब्बत एक दरिया है, डूबना सभी को है जिसमें…२
क्यों डरते हो मुझसे, कूदो और पार करो मुझे!

छोड़ो सारी दुनिया को पीछे, दुनिया ज़ालिम है…२
में वफादार हूँ, आओ और प्यार करो मुझे!

Love Shayri


सजा

हमारे दिल को कुछ इस तरह सजा दी उन्होंने,
नज़रें भी उठाई और फिर झुका ली उन्होंने!

शायद वो ही लिखेंगे अब मुकद्दर हमारा,
हमारे दिल की भी कमान सम्हाल ली है उन्होंने!

खुद आवाज़ दी और पलट के भी न देखा,
कुछ इस तरह ऐसे जान निकाल ली उन्होंने!

ना चिट्ठी ना सन्देश और ना ही वो गुजरे इधर से,
लगता है जैसे कोई नै दुनियां बसा ली उन्होंने!

की हमारे दिल को कुछ इस तरह सजा दी उन्होंने!!


फ़नकार.

“बू-ए-वफ़ा’ ने तस्सवूर का ‘तलबगार’ बना दिया,
आरज़ू-ए-वसल को ला-हासिल’ ‘इन्तज़ार’ बना दिया,
.
सुना था एक इश्क़ धड़कता है तेरे सीने में भी सनम,
उसी इश्क़ की चाहत ने मुझे ‘फ़नकार’ बना दिया”


तू ही मेरी आवाज़ है

कभी तू आँखों की कशिश,
कभी तू मन का राज़ है!

तू ही तू ईस दिल के अन्दर,
तू ही इस दिल का साज़ है!

कभी तू लहराती है पवन,
कभी तू खुशनुमा याद है!

तू ही तो है जन्नत मेरी,
तू मेरी शायरी, तू ही आवाज़ है!!

Love Shayari


वो भी क्या दिन थे जब जिन्दगी गुले गुलजार थी।
मेरे दामन में हर वक्त सावन सी बहार थी।।
उनके दम से ही तो चमकता था ये चेहरा मेरा ।
सच में वही मेरा हबीब वही मेरी सरकार थी!!


वो है मुझमें, मेरा हर वक़्त है वो…
मेरी सांसे, मेरी धड़कन..हाँ मेरी जान है वो!
खिलखिलाती धुप मेरी, हाँ मेरी छांव है वो…
मेरी ज़िन्दगी की मखमली शाम है वो!!


एक किताब लिखना चाहता हूँ,
हर पन्ने पर तेरा ज़िक्र लिखना चाहता हूँ…
क्या हुआ जो तू मेरा ना हुआ,
अपनी अधूरी कहानी की मुकम्मल मुहोब्बत लिखना चाहता हूँ!!


सुनों आज याद आ रही फिर,
देखों ना कैसे बेंतेहाँ आ रही फिर!
हिचकियों को ज़रा सम्हाल लेना,
जानता हूँ पढ़ के शर्मा रही फिर!!

चिंता न कर में नहीं हूँ,
खामखा दस्तक पे घबरा रही फिर!
याद तो आती होगी, है न…
या बोल दे झूंठ की नहीं आ रही फिर!!

मातब करना इकरार जाने देना,
क्या हुआ जो इधर जान जा रही फिर!
सहेली तुम्हारी जातन करती है,
एक-एक गलतियाँ गिनवा रही फिर!!

में पागल हूँ, तेरे लिए, बना रहूँगा में…
हाय देखो, कैसे तुम मुस्कुरा रही फिर!!


बात चली “चाँद” से सुन्दर कौन…
हम गलती से ‘गुलाब’ बता बैठे,
झुंझलाये वो इस कदर,
चेहरे से “नकाब” उठा बैठे!!

इस बेबसी का आलम हम तुम्हें समझा नहीं सकते,
फिर याद आए हो तुम, फिर से चाय का प्याला साथ है.

जब तेरे नूर का सूरज ढल जाएगा,
जब तेरा अक्स भी तुझको डराएगा!
तब उस अँधेरी रात में तेरा हाथ पकड में,
कुछ इस कदर करीब कर लूँगा!
तेरी छोड़ी हुई सांसों को अन्दर में कर लूँगा,
तेरी आँखों से निकले अक्षों को में पी लूँगा!
उस काली अंधियारी रात को,
अपने प्यार की र्रोशनी से भर दूंगा!
सात जन्मों का नहीं इस पल का वादा है तुझसे,
तेरा हाथ में मरते दम तक न तोडूंगा!!

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